ये उनसभी महिलावों को समर्पित है जो एक माँ हैं,बहन हैं,बीबी हैं,बेटी हैं,दोस्त हैं,प्रेमिका हैं,सहयोगी हैं तथा अन्य हैं।पुज्नीय हैं।जिस घर में महिला की इज्जत नहीं होती वो घर भी नहीं बचता,खान-दान का नाश हो जाता है । आज जो महिलावों पर अपनी मर्दानगी साबित कर रहें हैं तथा दहेज़ हत्या ,भ्रूण हत्या,बलात्कार,छेड़-छाड़ ,मारपीट तथा अन्य घृणित अपराध करते हैं वो असल में अपनी माँ के कोख को गाली देते हैं ।उनके खून में अवश्य कोई गन्दगी होगी। कब तक सहेंगी।कब तक ....
Monday, November 19, 2012
Cancer जानकारी ही बचाव है
इंसान का शरीर एक मशीन की तरह होता है. जिस तरह मशीन में खराबी आती है उसी तरह इंसान के शरीर में भी कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं. इन समस्याओं को हम बीमारियों का नाम देते हैं. इन्हीं बीमारियों में से एक लाइलाज और बेहद जटिल बीमारी है कैंसर.दुनियाभर में लाखों लोग प्रतिवर्ष इस बेहद जटिल बीमारी की वजह से दम तोड़ देते हैं. यूं तो यह बीमारी लाइलाज नहीं है लेकिन सिर्फ तब तक जब तक कि इसका सही समय पर पता चले. जानकार मानते हैं कि कैंसर लाइलाज नहीं है बस जरूरत है इसका सही समय पर पता चलने की और सही इलाज की. एक आम आदमी के लिए यह जरूर एक लाइलाज बीमारी हो सकती है लेकिन इसका महंगा इलाज इसे अमीर लोगों के लिए साध्य बनाता है. यह समाज के लिए बहुत बुरा है कि कैंसर जैसे रोग भी अमीर और गरीब के बीच अंतर देखते हैं.कैंसर क्या होता है?
कैंसर को लेकर लोगों में बहुत सी भ्रांतियां व्याप्त हैं. बहुत से लोगों का मानना है कि कैंसर का कोई इलाज नहीं है. दरअसल, कैंसर शरीर की आधारभूत इकाई कोशिका (सेल) को प्रभावित करता है. शरीर में नए सेल्स और पुराने सेल्स के बदलाव की प्रक्रिया में कैंसर हो सकता है. सामान्य तौर पर शरीर में कुछ नए सेल्स बनते हैं और पुराने सेल्स टूटते हैं जिनके असमान्य जमाव से कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है. आइए जानें किन परिस्थितियों में कैंसर हो सकता है:
कैंसर के लक्षण
कैंसर के लक्षण बेहद आम लेकिन जल्द नजर में आने वाले होते हैं. एक कैंसर मरीज की सूरत देखकर ही लगता है कि कुछ गड़बड़ है. जानकारों के अनुसार कैंसर के शुरुआती लक्षण निम्न हैं:
कैंसर का इलाज
कैंसर का पता बायोप्सी नामक टेस्ट से चलता है. इसके बाद कैंसर का पता लगाने के बाद जो इलाज किया जाता है, उसमें कीमोथेरेपी प्रमुख है. कीमोथेरेपी कैंसर के असर को कम करने के लिए दी जाती है. उदाहरण के लिए अगर कैंसर चौथी स्टेज पर हो तो यह थैरेपी इसे दूसरी स्टेज पर ले आती है. यह हर तरह के कैंसर में नहीं दी जा सकती. इसी तरह रेडियोथेरेपी शरीर में कैंसर के ऊतकों को कम करने के लिए दी जाती है.
डॉक्टर मानते हैं कि कैंसर ठीक हो सकता है बशर्ते इसका डटकर सामना किया जाए. हमें इससे डरना नहीं चाहिए. कैंसर पर विजय हासिल करने में इन सुझावों पर ध्यान दें:
1. जांच होने के बाद कैंसर के उपचार का पहला अवसर ही सर्वश्रेष्ठ अवसर है. इस अवसर को गंवाना जानलेवा हो सकता है.
2. निकट के कैंसर संस्थान का ही उपचार के लिए चयन करें, ताकि आप लम्बे इलाज के लिए आवश्यकतानुसार समय-समय पर अपने विशेषज्ञ के पास पहुंच सकें.
3. कैंसर विशेषज्ञ की ही बातों पर अमल करें. गैर-जानकार व्यक्ति की सुनी-सुनाई बातों को सुन आप भ्रमित हो सकते हैं.
4. बॉयोप्सी जांच से कैंसर फैलता नहीं है. इस गलत धारणा के कारण बहुत से लोग अपना उपचार समय से न कराकर मर्ज बढ़ा लेते हैं. बॉयोप्सी से ही कैंसर के प्रकार व संभावित उपचार का निर्धारण होता है.
5. कैंसर विशेषज्ञ से रोग की वार्षिक जांच कराते रहने से रोग का प्रारंभिक अवस्था में पता चल जाता है. प्रारंभिक अवस्था में अधिकांश कैंसर पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, बशर्ते आप पूरी तरह से मन लगाकर उपचार में जुट जाएं.
कैंसर से दूर रहने के सरल तरीके
अगर हम अपनी जीवनशैली में थोड़ा-बहुत भी परिवर्तन करते हैं तो कैंसर से बच सकते हैं. डॉक्टर कैंसर से दूर रहने के कुछ बेहद सरल तरीके बताते हैं जो निम्न हैं:
कैंसर की रोकथाम
ध्रूमपान न करें: विश्व में कैंसर से बचने के लिए तम्बाकू से बचाव एकमात्र उपाय है.
मोटापा: कैंसर नियंत्रण के लिए भोजन में सुधार दूसरी महत्वपूर्ण पहल है. कई प्रकार के कैंसर का वजन अधिक होने और मोटापे से सीधा संबंध है. यही नहीं, फलों और सब्जियों की अधिकता वाला भोजन लेने से कई प्रकार के कैंसर से लड़ने में सहायता मिलती है.
नियमित व्यायाम: नियमित शारीरिक व्यायाम और सही शारीरिक वजन और संतुलित भोजन निश्चित रूप से कैंसर के खतरे को कम करता है.
किरणों से बचना: सूर्य की किरणों से बचना. सनस्क्रीन और सुरक्षित वस्त्र का उपयोग विभिन्न प्रकार के कैंसर की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय है.
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बस शारीरिक संबंध बनाने में ही रुचि
आमतौर पर यह माना जाता है कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुष शारीरिक संबंधों के प्रति अधिक आकर्षित रहते हैं. महिलाएं उनके लिए इच्छापूर्ति का एक साधन मात्र हैं. प्रेम संबंधों में भी पुरुष अपनी जरूरत के हिसाब से महिलाओं की भावनाओं को आंकते हैं. महिलाएं जिन्हें हम भावुक ज्यादा मानते हैं, वह जल्दी ही उनके बहकावे में आ जाती हैं और विवाह के पहले ही स्वयं को अपने प्रेमी के प्रति समर्पित कर देती हैं. भोग और विलास से परिपूर्ण पुरुष अगर अपनी प्रेमिका को शारीरिक संबंध बनाने के लिए राजी नहीं कर पाता तो इसके लिए वह अपने संबंध से बाहर का रुख करता है. आम बोलचाल में इसे पेड-सेक्स कहते हैं. महिलाओं को भोग की वस्तु समझने वाले पुरुष शारीरिक संबंधों के प्रति इतना आसक्त हो जाते हैं कि वे इसके लिए भारी-भरकम कीमत चुकाने को भी तैयार रहते हैं. ऐसे पुरुष के लिए यह कतई मायने नहीं रखता कि किसी की प्रेम भावनाएं उससे जुड़ी हुई हैं.
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विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में पांच हजार की उधारी चुकाने के लिए एक युवक ने अपनी पत्नी की इज्जत का ही सौदा कर दिया। महिला के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी और पीडित महिला के पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मिली जानकारी के अनुसार लटेरी थाना क्षेत्र के अर्जुन अहिरवार ने लियाकत नाम के व्यक्ति के पांच हजार रूपए उधारी में लिए। अर्जुन उधारी के राशि नहीं चुका पाया तो लियाकत ने उसकी पत्नी की इज्जत की मांग कर डाली। इसके लिए दोनों के बीच समझौता भी हो गया।
किसी ने नहीं की मदद
समझौते के मुताबिक अर्जुन पत्नी को दर्शन कराने के बहाने बाहर लेकर निकला। सुनसान स्थान पर पहुंचकर लियाकत को सौंप दिया। महिला ने विरोध किया और लियाकत द्वारा बलात्कार किए जाने पर वह रोई भी, मगर मदद के लिए कोई नहीं आया।
सुहागरात पर बीवी को किया दोस्तों के हवाले
लव मैरेज करने वाली एक दुल्हन को अपने प्रेमी की असली तस्वीर उस समय देखने को मिली, जब उसने सुहागरात के मौके पर उसे अपने सात दोस्तों के हवाले कर दिया। प्रेमी उसे घर से भगाकर ले गया था। दोनों ने गाजियाबाद के एक मंदिर में शादी की थी। इससे पहले युवती के पिता ने 18 अक्टूबर को औरंगाबाद थाने में तहरीर देकर गांव के ही एक युवक पर बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का आरोप लगाया था। पुलिस तभी से इस प्रेमी जोडे़ की तलाश कर रही थी।
पांच दिन पहले पुलिस ने लड़की को बरामद कर लिया जबकि उसका प्रेमी पुलिस को देखकर फरार हो गया। प्रेमिका का आरोप है कि सुहागरात पर उसके प्रेमी ने अपने सात दोस्तों के साथ उससे गैंगरेप किया। यह सिलसिला एक महीने तक चलता रहा। युवती ने बताया कि वह थाना औरंगाबाद क्षेत्र के गांव अशरफपुर की रहने वाली है। वह पिछले 4 साल से गांव के युवक मोनू से बेहद प्यार करती थी। 18 अक्टूबर की रात को प्रेमी की प्लैनिंग के तहत वह घर से ढाई लाख कीमत के सोने-चांदी के गहने लेकर भाग गई। प्रेमी ने गाजियाबाद में किराये पर कमरा ले रखा था।20 अक्टूबर को दोनों ने एक मंदिर में जाकर शादी रचा ली। शादी के बाद जब वह अपने कमरे पर पहुंची तो उसका प्रेमी उसे छोड़कर दोस्तों के साथ शराब पीने चला गया। आरोप है कि देर रात वह अपने सात दोस्तों के साथ आया और उसे दोस्तों के हवाले कर दिया। लड़की का आरोप है कि एक महीने तक बंधक बनाकर उसके साथ सभी आठ आरोपियों ने गैंगरेप किया। परिजनों की मदद से बुलंदशहर पुलिस ने युवती को 10 नवंबर को गाजियाबाद के बस स्टैंड चौराहा से बरामद कर लिया। एसपी सिटी श्रीकांत यादव ने बताया कि लड़की अपने बयान कई बार बदल चुकी है। शुरुआती पूछताछ में उसने पुलिस को भी गुमराह करने की कोशिश की। दो दिन पहले लड़की ने मैजिस्ट्रेट के सामने अपने साथ हुए गैंगरेप का खुलासा किया। पुलिस ने लड़की का मेडिकल कराया है। पुलिस लड़की के बयानों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर मुख्य आरोपी की तलाश कर रही है। प्यार ठुकराया तो फेक अकाउंट बना पोस्ट कर दीं अश्लील तस्वीरें
प्यार का प्रपोजल ठुकराए जाने पर एक युवक ने ऐसा कदम उठाया कि उसे जेल की हवा खानी पड़ी। बदला लेने के लिए मकसद से युवक उस लड़की के नाम से फेसबुक पर फेक अकाउंट बनाकर अश्लील फोटो पोस्ट कर रहा था।
तलेगांव के रहने वाले भूपेश ने इंजिनियरिंग की एक स्टूडेंट से प्यार का इजहार किया, लेकिन उसने मना कर दिया। इस पर गुस्साए भूपेश ने लड़की से बदला लेने की ठान ली। उसने लड़की के नाम से फेसबुक पर फेक प्रोफाइल बनाकर अश्लील तस्वीरें और मैसेज अपडेट करना शुरू कर दिया। उधर लड़की सो समझ नहीं आ रहा था कि यह हरकत कौन कर रहा है। आखिरकार लड़की ने पुलिस की मदद ली और साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद साइबर सेल ने फेक आईडी ऑपरेट करने वाले का आईपी अड्रेस ढूंढ निकाला। इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर की मदद से पुलिस ने रायगढ़ जिले के नवी पोसरी के उस साइबर कैफे पहुंची, जहां से उस आईडी को ऑपरेट किया जाता था। साइबर कैफे में पूछताछ करने पर पता चला कि वहां पर काम करने वाली लड़की का भाई अक्सर वहां आया करता है। उस लड़की का भाई कोई और नहीं बल्कि भूपेश ही था। फोन पर प्रेम हुआ था, मिली तो बेहोश हो गई
आजकल इंटरनेट और फोन आदि के माध्यम से अक्सर लोग संपर्क में आते हैं। फोन और दूसरे संचार के माध्यम से वे एक-दूसरे के करीब भी आ जाते हैं, पर अक्सर इसमें ऐसा भी धोखा हो जाता है कि सिवाय अफसोस करने के कुछ नहीं बचता। केरल में कनूर जिले में 23 साल की एक इंजीनियर का मामला भी कुछ ऐसा ही निकला। उसको उस वक्त शॉक लगा जब वह अपने 'प्रेमी' से मिली।
पिछले एक साल से वह फोन पर अपने इस प्रेमी के साथ बातें कर रही थीं। साल भर बाद जब वह अपने इस फोन प्रेमी से मिली तो सारा रोमांस धरा का धरा रह गया और दिल भी टूटा सो अलग। इसलिए कि उनका यह प्रेमी तो 67 साल का निकला।
यह भी तब पता चला जब यह लड़की अपने फोन वाले प्रेमी से मिलने तिरुअनंतपुरम आई। यहां उसे जीवन का सबसे बड़ा शॉक लगा। पुलिस ने बताया कि लड़की काफी देर से उस बस स्टॉप पर टहल रही थीं जहां उसके प्रेमी ने उससे मिलना तय किया हुआ था। जब काफी देर तक वह नहीं आया और लड़की वहां परेशान होकर टहलती रही, तो पुलिस उसे थाने ले आई।थाने में उससे पूछा गया कि वह वहां क्यों टहल रही थी, तब उसने अपना किस्सा बयां किया। लड़की से उसके प्रेमी का मोबाइल नंबर लेकर पुलिस ने उसे थाने बुलाया। वह आया तो उसे देखते ही लड़की बेहोश हो गई। इसलिए कि वह आदमी निकला 67 साल का। इस आदमी ने पुलिस को बताया कि वह तो सिर्फ मनोरंजन के लिए फोन पर बातें किया करता था। उसका इरादा गलत नहीं था। बहरहाल, पुलिस ने लड़की के घरवालों से संपर्क कर उसे वापस उसके घर भेज दिया है।
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Tuesday, November 13, 2012
आखिर बलात्कारी से शादी क्यों
कैसा मजाक है इस समाज का नारी के साथ कि पहले तो बलात्कारी बलात्कार करता है और फिर यह समाज नारी को इंसाफ दिलाने के बदले बलात्कारी से शादी करने का प्रस्ताव रखता है. ऐसे प्रस्ताव में यह समझ पाना मुश्किल है कि आखिरकार दंडित किसे किया जा रहा है – जिसने बलात्कार किया उसे या फिर जिसके साथ बलात्कार हुआ. ऐसे में एक पुरानी कहावत सच लगने लगती है कि 'एक नारी हमेशा दंडित होगी चाहे उसने गुनाह किया हो या नहीं'.
बलात्कार एक ऐसी पीड़ा है जिससे एक नारी शारीरिक और मानसिक स्तर पर टूट जाती है. जब एक नारी को लगने लगता है कि अब जिन्दगी का साथ छोड़ मौत को गले लगा लेना चाहिए ऐसे में यदि कोई यह कहे कि जिसने आपकी जिन्दगी को इस स्तर पर लाकर खड़ा किया है आप उससे ही जिन्दगी भर का रिश्ता जोड़ लीजिए तो शायद यह एक घटिया मजाक के सिवा कुछ और नहीं है. ऐसे में सवाल यह है कि कैसे एक नारी उस पुरुष के साथ हर रात गुजार सकती है जिसने उसकी जिन्दगी की एक रात को भयानक और डरावना बना दिया हो.जब कोई मर्द एक नारी के साथ बलात्कार करता है तो समाज यह भूल जाता है कि किसने बलात्कार किया. उसे सिर्फ यह याद रहता है कि किसका बलात्कार हुआ है.
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जन्म लेते ही मार डाला
सभी ने एक बात हमेशा गौर की होगी कि पड़ोस या घर में अगर लड़का पैदा हो तो खुशियों की जैसे बहार आ जाती है लेकिन अक्सर देखने में आता है कि लड़कियों के होने पर सब उतने खुश नहीं होते जितने लड़का पैदा होने पर होते हैं. यह हालत गांवों की तरफ अधिक है जहां कई बार तो लड़की के पैदा होते ही या तो उसे मार दिया जाता है या फिर घर के सदस्य उसे गाली दे अपनी मन की आग को शांत कर लेते हैं. लेकिन यह फर्क क्यों? क्या लड़का घरवालों को लड़की से अधिक प्यारा होता है?भारत में कन्या भ्रूण हत्या जैसा पाप काफी समय से समाज पर एक कलंक की तरह लगा हुआ है जो आज शिक्षा के अस्त्र से भी नहीं हट रहा है. "यत्र नार्यस्तु पूजयते, रमन्ते तत्र देवता" अर्थात जहां नारी की पूजा होती है वहां देवता का वास होता है, ऐसा शास्त्रों में लिखा है लेकिन विश्वास नहीं होता आज भारतीय समाज में ही इतनी कुरीतियां फैली है जिससे नारी के प्रति अत्याचारों को बढ़ावा मिला है.
जीवन की हर समस्या के लिए देवी की आराधना करने वाला भारतीय समाज कन्या के जन्म को अभिशाप मानता है. लेकिन कन्या भ्रूण हत्या में अगर देखा जाएं तो सबसे बड़ा दोष हिंदू धर्म का भी लगता है जो सिर्फ पुत्र को ही पिता या माता को मुखाग्नि देने का हक देती है और मां बाप के बाद पुत्र को ही वंश आगे बढ़ाने का काम दिया जाता है. हिंदू धर्म में लड़कियों को पिता की चिता में आग लगाने की अनुमति नहीं होती मसलन ज्यादातर लोगों को लगता है कि लड़के न होने से वंश खतरे में पड़ जाएगा. इसके साथ ही समाज में आर्थिक और सामाजिक तौर से जिस तरह समाज का विभाजन हुआ है उसमें भी लड़कियों को काम करने के लिए बाहर निकलने की अधिक आजादी नहीं है. आज भी आप देखेंगे कि लड़कियों के काम करने पर लोगों को बहुत आपत्ति होती है.
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टीवी देखने के बहाने बच्ची से रेप, लाश कूड़ेदान में
Sunday, October 28, 2012
Precious
womenhelp1@gmail.com
Saturday, October 27, 2012
महिलाओं के जीवन का दर्दनाक अंत
महिलाओं द्वारा अपने ही जीवन का अंत करना या उनकी संदेहास्पद मौत एक दुखद घटना है लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं जो ऐसे हालातों के लिए स्वयं महिला को ही दोषी ठहराते हैं. ऐसे लोगों का मत है कि अति महत्वकांक्षाओं और अपने हित साधने के चक्कर में महिलाएं सही-गलत जैसी बातों को नजरअंदाज कर देती हैं. अपनी असीम इच्छाओं को पूरा करने के लिए वह सारी हदें पार कर जाती हैं. अपने भविष्य को सुधारने के लिए महिला यह कदम उठाती है लेकिन धीरे-धीरे वही कदम उसके लिए एक अभिशाप बनने लगता है. नाम और शोहरत पाने की लालसा में महिलाओं को लगता है कि वह अपने फायदे के लिए पुरुष का इस्तेमाल कर रही हैं लेकिन जब उपभोग करने के बाद महिला को दूध में से मक्खी की तरह बाहर फेंक दिया जाता है तब उसके पास अपने जीवन को समाप्त करने के अलावा और कोई रास्ता ही नहीं बचता. इस तरह के मामलों में महिलाओं को पीड़िता ना मानने वाले लोगों का कहना है कि आत्महत्या करने वाली या संदेहास्पद मृत्यु की शिकार हर महिला को पीड़िता की नजर से देखना और पुरुष को दोषी ठहराना नासमझी होगी.
वहीं दूसरी ओर महिलाओं हितों के साथ पूर्ण सहमति रखने वाले लोगों का कहना है कि कोई व्यक्ति अपनी खुशी से अपने ही जीवन का अंत नहीं करता. अगर कोई महिला ऐसा कदम उठाने के लिए विवश होती है तो हमें उसकी मनोदशा पर विचार करना चाहिए. महत्वाकांक्षा रखना या किसी से प्रेम करना किसी भी रूप में गलत नहीं है, बल्कि यह तो मनुष्य का अधिकार है कि वह अपने जीवन को सफल बनाने के लिए प्रयासरत रहे. लेकिन पुरुष प्रधान भारतीय समाज में महिलाओं को केवल उपभोग की वस्तु की समझा जाता है. यही वजह है कि उसे झूठे सपने दिखाकर, उसका मनचाहा शोषण करने के बाद उसे तड़पने के लिए छोड़ दिया जाता है. हालातों का सामना ना कर पाने के कारण महिला अवसाद ग्रस्त हो जाती है और समाज के ताने उसे आत्महत्या करने के लिए विवश कर देते हैं. महिलाओं को पीड़िता की नजर से देखने वाले लोगों का मत है कि महिला के आत्महत्या करने या उनकी संदेहास्पद ढंग से मृत्यु के बाद अगर उन्हीं को ही अपराधी ठहरा दिया जाता है तो इससे विकृत पुरुष मानसिकता को और अधिक बल मिलेगा और आगे ना जाने कितनी ही भोली-भाली, मासूम महिलाएं शातिर पुरुषों की शिकार बनती रहेंगी.
उपरोक्त चर्चा और वर्तमान परिदृश्य पर विचार करने के बाद हमारे सामने निम्नलिखित प्रश्न उठते हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:
1. क्या भविष्य को सुधारने के लिए महिलाओं का महत्वाकांक्षी होना उनके चरित्र पर प्रश्नचिह्न लगाता है?
2. क्या किसी महिला का पुरुष से प्रेम करना या उस पर विश्वास करना गलत है?
3. स्त्रियों के साथ होने वाली ज्यादतियों के लिए पुरुषों को ही अपराधी समझा जाता है लेकिन वर्तमान हालातों के अनुसार क्या हमें अपनी इस धारणा में बदलाव नहीं लाना चाहिए?
4. अगर प्रेम और विश्वास का नतीजा मौत है तो इसके लिए हमें किसे दोषी कहना चाहिए? तू बेचारी नहीं हमारा समाज बहुत आगे बढ़ रहा है. दुनिया में हर जगह विकास हो रहा है. अमेरिका हो या भारत या पाकिस्तान हो विकास का नाम आज हर जगह बड़े जोश के साथ लिया जा रहा है. पर हम कौन से विकास की बात कर रहे हैं जहां विकास को केवल पुरुष के नाम के साथ जोड़ा जा रहा है और महिलाओं का विकास बस नाम के लिए रह गया है. सोचिए जरा जब नौ साल की बच्ची के साथ बलात्कार किया गया होगा और जब उस बच्ची के घर वालों को इन्साफ का इंतजार करते हुए उनके जीवन के 20 वर्ष बीत गए होंगे. सुनने में भी डर लगता है कि ना जाने कैसे उन लोगों ने वो 20 वर्ष बिताए होंगे. ऐसी एक घटना नहीं है जो महिलाओं के साथ घटी हो और भी ना जाने ऐसी कितनी घटनाएं होंगी जो आपके दिल को दहला देंगी. आपकी नजरों में किसी रिश्ते को तोड़ने की कीमत क्या होती होगी ज्यादा से ज्यादा दुख और निराशा में अपना पूरा जीवन बिता देना. पर अब आपको डर के साथ-साथ धक्का भी लगेगा क्योंकि एक महिला ने रिश्ता तोड़ने की कीमत में अपनी आंखें गंवाई हैं. जिस दिन उसने सोचा कि वो अपने पति के अत्याचार और नहीं सह सकती उस दिन उसने अपने पति से अलग होने का फैसला कर लिया. फिर क्या था उसे फैसला करने की सजा सुनाई गई और सजा में जीवन भर का अंधापन, पूरे शरीर पर तेजाब के दाग दिए गए. कभी किसी महिला ने तो अपने पति को रिश्ता तोड़ने की ऐसी सजा नहीं दी होगी. 'सवाल असभ्य का नहीं संस्कृति का है'क्या महिलाओं के विकास के बिना संपूर्ण विकास संभव है हम बात करते हैं कि विकास करना है और समाज को बदलना है पर 'क्या महिलाओं के विकास के बिना संपूर्ण विकास संभव है. नहीं विकास का अर्थ समाज में रहने वाले सभी वर्गो के विकास से संबंधित होता है. हम शायद यह सोचने लगे हैं कि महिलाओं का विकास से कोई नाता नहीं हैं पर यह सोचना गलत है क्योंकि महिलाएं भी समाज का ही एक हिस्सा हैं जिनके बिना विकास संभव नहीं है. सोचिए जब आपके शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द होता है या कोई हिस्सा खराब हो जाता है तो आप क्या अपने आपको पूर्ण रूप से स्वस्थ कहेंगे. इसी तरह वो समाज भी लंगड़ा है जहां महिलाएं विकास का हिस्सा नहीं हैं. मानसिक सोच छोटी है समाज के झूठे रक्षकों की पुरुष चाहे कितना भी कह ले कि हम तो चाहते हैं कि महिलाएं विकास करें पर महिलाओं को भी अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए. कुछ पुरुष कहते हैं कि महिलाएं केवल घर के काम के लिए होती हैं और सही रूप में उनकी जिम्मेदारी घर ही है. उन पुरुषों को समझना होगा कि महिलाओं के विकास का मतलब उन्हें केवल ऑफिस भेजना ही नहीं है. महिलाओं के विकास से मतलब उस विकास से है जहां वो अपनी बातों को खुलकर सामने रख सकें, जहां वो अपने लिए जरूरी फैसले ले सकें और उनकी जिन्दगी में उनका उतना ही हक हो जितना पुरूष का अपनी जिन्दगी पर होता है. क्या महिलाएं अपने लिए आवाज उठाना नहीं चाहतीं? अगर आज हर बात पर गहराई से चिंतन किया जाए तो सच सामने आता है जिसे जानने के बाद चिंतन और गहरा हो जाता है. कुछ पुरुष जो यह कहते हैं कि महिलाएं खुद के विकास से डरती हैं शायद यह बात कुछ हद तक सही हो सकती है पर सच तो यही है कि महिलाएं खुद के विकास से डरती नहीं हैं बल्कि उनके ऊपर उन्हीं पुरुषों का दबाव होता हैं जो समाज के रक्षक बनते हैं और महिलाओं को समाज के विकास की बाधा समझते हैं. संकल्प कीजिए कि "अब अपने फैसले मैं खुद लूंगी" क्या सही है क्या गलत है बचपन से ही आपको भी सिखाया गया है तो फिर आपके लिए फैसले लेने का हक किसी और को क्यों है? हां, किसी से राय लेना गलत नहीं है पर किसी पर अपनी राय थोप देना गलत है जो अकसर सिर्फ महिलाओं के साथ होता है और यह होता भी रहेगा जब तक महिलाएं अपने लिए आवाज उठाना शुरू नहीं करेंगी. महिलाओं को याद रखना होगा कि अपने लिए कदम खुद उठाए जाते हैं कोई भी आपके जीवन में बदलाव के लिए मदद नहीं कर सकता है. ------------------------- महिलाओं को पीछे प्रकृति ने महिला और पुरुष को एक-दूसरे के सहयोगी और पूरक के रूप में पेश किया है लेकिन सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इन दो अनमोल कृतियों को हम हमेशा प्रतिस्पर्धा और भेदभाव जैसे मसलों में ही उलझा हुआ देखते हैं. निश्चित रूप से इसके पीछे महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कमतर और दूसरे दर्जे का मानने जैसी प्रवृत्ति विद्यमान रही है. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में महिला उत्थान और उन्हें समान अधिकार दिलवाने जैसी मुहिम में तेजी आई है लेकिन जमीनी स्तर पर महिलाओं के हालातों में आज भी हम बहुत अधिक परिमार्जन नहीं देख सकते क्योंकि आज के आधुनिक युग में भी महिलाओं को अपनी प्रॉपर्टी समझने वाले पुरुषों की कोई कमी नहीं है. समाज अभी भी पुरुष प्रधान है
देश हो या विदेश प्राय: सभी समाज अपने मौलिक रूप में पुरुष प्रधान रहे हैं जिसका खामियाजा हमेशा महिलाओं को ही भुगतना पड़ता है. यूं तो प्रारंभिक समय से ही महिलाओं को पुरुषों के अधीनस्थ रखने का प्रचलन रहा है लेकिन हाल ही की एक घटना इस परंपरा को और अधिक पुख्ता करते हुए यह प्रमाणित कर रही है कि भले ही समय बदल गया हो लेकिन मानव स्वभाव और नजरिया कभी परिवर्तित नहीं हो सकता.
महिलाएं खुद तय करें अपने कर्तव्य हां, यह बात जरूर है कि महिलाओं को भी अपने हितों की ओर ध्यान देने का पूरा अधिकार है लेकिन क्या अपने हितों को साधते हुए उनका अपने परिवार के प्रति उदासीन रवैया रखना उचित है? वैसे भी अधिकांश परिवारों में महिलाएं ही अपने बच्चों और पति की देखभाल करती हैं क्योंकि स्वाभाविक तौर पर ही पुरुषों को अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई हैव्यवहारिक रूप में अगर देखा जाए तो जिस प्रकार व्यक्ति का स्वभाव अलग-अलग होता है उसी प्रकार उसकी प्राथमिकताएं और जरूरतें भी अलग होती हैंबहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जो अपने व्यक्तिगत जीवन से ज्यादा परिवार और बच्चों को महत्व नहीं देतीं. वहीं कुछ का जीवन केवल अपने परिवार तक ही सीमित रहता है. निश्चित तौर पर यह व्यक्तिगत निर्णय है, जिसका पालन करने के लिए कोई डिक्शनरी या फरमान बाध्य नहीं कर सकते. |
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एक नौ साल की लडकी ने ऎसा काम कीया जिसे आप सुनकर हैरान हो जायेंगे। आपको पता है इस नौ साल की छोटी सी लडकी ने सिर्फ सात महीनों मे...
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ब्राजील। सामान्य महिला का गर्भकाल 9 महीने का होता है। कई बार ये कम भी हो सकता है और एक-दो दिन आगे भी। लेकिन ब्राजील में 84 ...
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एक ओर हमारे और आपके घर में रोज सुबह रात का बचा हुआ खाना बासी समझकर फेंक दिया जाता है तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें एक वक्त...