डीआईजी के सामने बयान दिलवाने के बहाने दरोगा ने रेप पीड़ित को फैजाबाद के एक होटल में अपनी हवस का शिकार बना लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपी दरोगा को गिरफ्तार कर लिया। युवती की तहरीर पर महिला थाने में दारोगा के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, आंबेडकरनगर जिले के कोतवाली अकबरपुर क्षेत्र की पहितीपुर निवासी 16 वर्षीय युवती ने चार महीने पहले अकबरपुर कोतवाली में रेप का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसकी जांच सीनियर सब-इंस्पेक्टर मान सिंह को सौंपी गई थी। बुधवार सुबह मान सिंह युवती को डीआईजी के यहां बयान दिलाने के बहाने फैजाबाद लेकर आया और शहर के सुभाष नगर इलाके में स्थित एक होटल में युवती को अपना रिश्तेदार बताकर कमरा लिया। दिनभर युवती उसी होटल में रही और देर शाम डीआईजी के न मिलने की बात कहकर मान सिंह ने युवती को कमरे में रुकने को कहा।
युवती का कहना है कि थोड़ी देर बाद मान सिंह लौटकर आया और जबरदस्ती करने लगा। थोड़ी देर बाद जब मान सिंह सो गया तो युवती ने परिचितों को एसएमएस कर घटना की जानकारी दी। पुलिस ने युवती को होटेल से बरामद किया और आरोपी दारोगा को पकड़ लिया। युवती का कहना है उसके पिता ने उसे घर से निकाल दिया है और वह अपने दादी के साथ रहती है।
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चार सगी बहनों की संदिग्ध हालात में मौत
उत्तर प्रदेश में आजमगढ जिले के निजामाबाद थाना क्षेत्र में बीती रात एक परिवार की चार बेटियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। आशंका यह जताई जा रही है कि कहीं इन चारों को खाने में जहर तो नहीं दिया गया।
पुलिस सूत्रों ने रविवार को बताया कि निजामाबाद थाने के चकबारी गांव के निवासी पंकज गौड़ की चार बेटियों ने रात को एक साथ खाना खाया और सो गईं। रात एक बजे चारों की तबीयत अचानक खराब हो गयी और उन्हें एक निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया जहां चारों की मौत हो गई। वहां चारों को मृत घोषित कर दिया गया। इनमें दो बहनें जुड़वां थीं जिनकी उम्र 11 साल थी। बाकी दोनों बहनों की उम्र 8 साल और 5 साल बताई जाती है। हालांकि परिजन लडकियों की मौत फूड पॉयजनिंग के कारण हुई बता रहे हैं, पुलिस इस मामले की जांच से पहले कुछ नहीं कह रही। सूत्रों के मुताबिक जिस तरह से पुलिस को सूचित किए बिना चारों लड़कियों का अन्तिम संस्कार कर दिया गया, उससे पुलिस को पूरा मामला संदिग्ध लगता है। फिलहाल इस मामले की हर कोण से जांच की जा रही है।
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पिता के हत्यारे को गोली मारना चाहती है बेटी
बेटी अपने एएसआई पिता रविंदर पाल सिंह के हत्यारे से बदला लेना चाहती है। पिता पर गोलियां दागते हत्यारे का वह सीन बेटी की आंखों से हट नहीं रहा है। बेटी ने देखा था कि सरेआम उसके पिता को गोली मारी जा रही थी और लोग तमाशबीन थे। अकाली नेता रंजीत सिंह राणा को अब वह बेटी गोलियों से उड़ाना चाहती है जिसे एएसआई पिता ने छेड़खानी करने से रोका था तो हत्या कर दी थी।
गुरुवार को आरोपी राणा को उसके दो साथियों के साथ पुलिस ने तरनतारन से अरेस्ट कर लिया। उसके पास से दो राइफलें, एक पिस्तौल, कारतूस और एक कार बरामद की गई। अपनी आंखों के सामने पिता को मरते देखने वाली बेटी ने फूट-फूट कर रोते हुए बताया है- घटना के वक्त चारो तरफ खड़े लोग तमाशा देख रहे थे। किसी ने मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाए। जब वह पिता को ऐम्बुलेंस में बैठाकर हॉस्पिटल ले जाने की कोशिश कर रही थी, तब भी कोई आगे नहीं आया। राणा कई दिनों से मुझसे बदतमीजी कर रहा था। यह बात मैंने जब पापा को बताई तो उन्होंने राणा से विरोध जताया। इससे नाराज राणा ने पापा पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। पापा को बचाने के लिए उन पर झुक गई तो उसने मुझ पर भी रायफल के बट से प्रहार किया पर मैं बच गई। पापा को कई गोलियां मारने के बाद भी राणा का मन नहीं भरा तो वह अपने घर से और हथियार लाया और फिर से कई गोलियां मारीं। मैं चीखती-चिल्लाती रही। मदद की गुहार लगाती रही पर किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। मैं मरते दम तक यह घटना नहीं भूल पाऊंगी। पुलिस के मुताबिक कस्बा छेहर्टा में एएसआई रविंदर पाल सिंह की बेटी ट्यूशन पढ़ने के लिए जाती थी। इस दौरान रास्ते में उसे कुछ युवक तंग करते थे। बुधवार को रविंदर पाल सिंह स्कूटर से बेटी को ट्यूशन छोड़ने गए थे। रास्ते में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की रामपुरा ब्रांच के पास लड़की ने परेशान करने वाले लड़कों को पहचान लिया और पिता को इसकी जानकारी दी। पिता ने स्कूटर रोककर लड़कों से बात करनी चाही। आरोप है कि इस दौरान वहां खड़े 3 युवकों में से एक राणा ने एएसआई के सीने में पिस्तौल से गोलियां दाग दीं। गोलियां खत्म होने पर एएसआई को राइफल से भून दिया गया। यह वारदात एएसआई की बेटी के सामने हुई। जब वह अपने पिता को बचाने गई तो राणा ने उस पर राइफल का बट मारा और उसे गोली मारने ही जा रहा था कि लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। यह देख राणा और उसके साथी मौके से फरार हो गए। |
ये उनसभी महिलावों को समर्पित है जो एक माँ हैं,बहन हैं,बीबी हैं,बेटी हैं,दोस्त हैं,प्रेमिका हैं,सहयोगी हैं तथा अन्य हैं।पुज्नीय हैं।जिस घर में महिला की इज्जत नहीं होती वो घर भी नहीं बचता,खान-दान का नाश हो जाता है । आज जो महिलावों पर अपनी मर्दानगी साबित कर रहें हैं तथा दहेज़ हत्या ,भ्रूण हत्या,बलात्कार,छेड़-छाड़ ,मारपीट तथा अन्य घृणित अपराध करते हैं वो असल में अपनी माँ के कोख को गाली देते हैं ।उनके खून में अवश्य कोई गन्दगी होगी। कब तक सहेंगी।कब तक ....
Sunday, December 16, 2012
फैजाबाद में दरोगा ने किया लड़की के साथ रेप
बेटे की चाहत में बीवी का मर्डर
बेटे की चाहत में सरकारी स्कूल के वाइस प्रिंसिपल ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। उसने 17 साल की लड़की से शादी भी कर ली, जो अब प्रेग्नेंट है। वारदात की चश्मदीद गवाह वाइस प्रिंसिपल की 21 साल की बेटी ने मर्डर केस दर्ज करा दिया। वह गिरफ्तार कर लिया गया है।
नजफगढ़ में सरकारी स्कूल के वाइस प्रिंसिपल गोविंद राम मीणा (50) को क्राइम ब्रांच ने 30 नवंबर को गिरफ्तार कर रिमांड के बाद बुधवार को जेल भेज दिया। अशोक विहार फेज-4 में रहने वाली उसकी बेटी पूजा ने 5 अक्टूबर को नजफगढ़ थाने में अपनी मां मंजू की हत्या का केस दर्ज कराया था। मंजू जाफरपुर में सरकारी स्कूल में टीचर थीं। उनका परिवार नजफगढ़ में रोशन मंडी में रहता था। पूजा ने पुलिस को बताया कि डेढ़ साल से उसके पिता दूसरी शादी करने के लिए मंजू से झगड़ा करते रहते थे। मंजू तैयार नहीं थी। गोविंद राम ने मंजू को धमकी दी कि अगर वह उसकी दूसरी शादी के लिए तैयार नहीं होगी तो उसे मौत के घाट उतार देगा। 9 जनवरी की रात पूजा पढ़ रही थी। उसकी मौसी आशा भी उसी के कमरे में सो रही थी। रात 12 बजे पूजा उठकर वॉशरूम जाने लगी। उसे मां-बाप के कमरे से आवाजें आई। उसमें दरवाजा हटाकर लाइट जलाई तो गोविंद राम मंजू के सीने पर बैठा उसका गला घोंट रहा था।गोविंद ने पूजा को कमरे के कोने में धक्का देकर किसी को बताने पर उसे भी मारने की धमकी दी। पूजा ने डर की वजह से मौसी को कुछ नहीं बताया। अब गोविंद ने अपने दो दोस्तों को फोन कर उन्हें उनकी पत्नियों समेत घर बुलाया। महिलाओं ने आकर उन्हें बताया कि मंजू की तबीयत खराब होने की वजह से उसे अस्पताल ले जा रहे हैं। गोविंद अपनी वैगन आर में उन्हें मंजू समेत ले गया। पूजा और आशा को घर छोड़ दिया गया। फोन पर गोविंद ने पूजा को बताया कि वह उसकी मां को राजस्थान ले जा रहा है और वहां नीमका थाना अस्पताल में उसका इलाज कराएगा। उसने पूजा को भी वहीं आने के लिए कहा। पूजा सीकर जिले के सिरोही गांव में अपनी मौसी आशा और मामा महेश के साथ पहुंची। वहां गोविंद ने उन्हें बताया कि डॉक्टर ने मंजू को मृत घोषित कर दिया है। महेश और आशा ने मंजू के गले पर निशान देखकर विरोध जताया, लेकिन गोविंद ने अपने चचेरे भाई रामस्वरूप की मदद से जल्दबाजी कर मंजू का अंतिम संस्कार कर दिया। पूजा के मुताबिक उसकी बुआ ग्यारसी देवी भी साजिश में शामिल थी। वह हमेशा वंश चलाने की बात कहकर गोविंद को बेटा पैदा करने के लिए उकसाती रहती थी। बुआ ने गोविंद की शादी 17 साल की लड़की से करा दी। वह लड़की अब प्रेग्नेंट है। पिता की धमकी से डरकर पूजा अपनी मौसी के साथ अशोक विहार में रहने लगी। वक्त गुजरने पर उसने हिम्मत कर पुलिस केस दर्ज करा दिया।
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शराब पिलाकर बेटी से बलात्कार, दोस्तों को भी बुलाया
केरल के एर्नाकुलम जिले में एक पिता पर अपनी बच्ची को शराब पिलाकर छह महीने तक उसका बलात्कार करने का आरोप लगा है। 40 साल के इस व्यक्ति के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अपनी छह साल की बच्ची से बलात्कार का आरोपी फिलहाल फरार है।
जिला अस्पताल में बच्ची का इलाज कर रहे मनोचिकित्सक अजीश रामचंद्रन के मुताबिक बच्ची ने उन्हें बताया था कि उसका पिता रोज उसे शराब पिलाता और फिर उसके साथ बलात्कार करता। बच्ची ने अपने पिता के 4-5 दोस्तों के नाम भी बताए, जिन्होंने उसके साथ रेप किया। बच्ची के मां-बाप अलग हो चुके हैं। बच्ची की मां किसी आश्रम में रहती है और उसका खर्च नहीं उठा सकती। इसलिए उसने अपने पति से आग्रह किया था कि एक बच्चे की देखभाल करे।
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लड़की से दो साल तक रेप करते रहे पिता-भाई
शिक्षा के मामले में देश के अव्वल राज्य केरल में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। आरोप है कि आठवीं क्लास में पढ़ने वाली एक नाबालिग से उसके पिता, चाचा और भाई दो साल तक बलात्कार करते रहे। नाबालिग से बलात्कार के आरोप में तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
उत्तरी केरल के कुन्नूर जिले की यह घटना समाज का घिनौना चेहरा सामने लेकर आई है। मामला तब सामने आया जब स्कूल की छुट्टी के बाद छात्रा ने घर जाने से मना कर दिया और रोने लगी। टीचरों ने जब लड़की से पूछताछ की तब जाकर हकीकत से पर्दा उठा। स्कूल प्रशासन को जैसे ही मामले का पता चला उसने तुरंत पुलिस को जानकारी दी और शिकायत दर्ज की गई। केस की जांच कर रहे थालास्सेरी सर्कल के इंस्पेक्टर एमवी विनोद कुमार ने बताया कि लड़की के पिता, 15 साल के भाई और चाचा को गिरफ्तार कर लिया गया है। भाई को जहां बाल सुधार गृह भेजा गया है, वहीं पिता और चाचा न्यायिक हिरासत में हैं। लड़की ने बताया कि जब वह छठी क्लास में थी तभी से उसे प्रताड़ना के इस दौर से गुजरना पड़ रहा था। पीड़ित लड़की से हुई पूछताछ के आधार पर विनोद कुमार ने बताया कि उसकी बड़ी बहन को भी इसी तरह यौन प्रताड़ना के दौर से गुजरना पड़ा था जिसके बाद दो साल पहले उसने सूइसाइड कर लिया था। |
Saturday, December 15, 2012
बेटी को इंसाफ दिलाने की कोशिश की तो घर से बेघर हो गई
ज्यादा दिन नहीं हुए, जब 7 साल की सिरजा (बदला हुआ नाम) भी अपनी उम्र की बाकी बच्चियों की तरह चंचल और चुलबुली थी। अब वह बड़ी गंभीर और चुप-चुप सी रहती है। अमूमन वह अपनी मां 32 साल की स्मिता (बदला हुआ नाम) और काउंसलर से ही बात करती है। वह 5 साल की थी, जब उसके नाना ने उसका यौन शोषण शुरू किया था और करीब एक साल तक यह सिलसिला चलता रहा।
सिरजा की मां स्मिता सिंगल मदर हैं। वह पेशे से टीचर हैं और अपने माता-पिता के घर रहती थीं। वह काम पर चली जातीं और उन्हें कुछ पता नहीं होता कि छोटी बच्ची सिरजा को उनकी गैर मौजूदगी में क्या कुछ झेलना पड़ता था। स्मिता ने बताया कि पहले सिरजा काफी बात करती थीं। बाद में उन्होंने गौर किया कि वह चुप-चुप सी रहने लगी है। उससे वजह पूछी तो उसने कुछ नहीं बताया। बस वह उस घर से निकलना चाहती थी। अपने नाना-नानी के साथ रहना उसे अच्छा नहीं लगता था। स्मिता को पहले तो कुछ समझ नहीं आया। पर, धीरे-धीरे उन्होंने बच्ची को विश्वास में लिया, उसे भरोसा दिलाया, तब सिरजा ने अपनी ममी को बताया, 'नानाजी मुझे नीचे (प्राइवेट पार्ट में) टच करते हैं।'स्मिता के लिए यह सदमे जैसा था। मगर, अभी इससे बड़े झटके लगने बाकी थी। घर में जब स्मिता ने यह मसला उठाया तो उन्हें पता चला कि उनकी मां को भी यह बात मालूम थी, पर उन्होंने इस बारे में चुप रहना ही बेहतर समझा। यहां तक कि उनके भाइयों ने भी उनका साथ देने से इनकार कर दिया क्योंकि घर की इज्जत का कबाड़ा करना उन्हें मंजूर नहीं था। स्मिता बताती हैं कि उनके सामने अपने पैरंट्स का घर छोड़ने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था। वह घर उन्होंने छोड़ दिया और वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराने पहुंचीं। बकौल स्मिता, 'मैं दो बजे दिन में थाने पहुंची थी, मगर मेरी एफआईआर भी आसानी से दर्ज नहीं हुई। पुलिस ऑफिसर मुझे देर तक यह समझाने की कोशिश करते रहे कि परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाना अच्छा नहीं है मुझे इस मामले को घर में ही निपटाना चाहिए। मगर, मैं नहीं मानी। अपनी बेटी का साथ देना मुझे ज्यादा जरूरी लगा। आखिरकार रात दस बजे एफआईआर दर्ज हुई।' एफआईआर दर्ज होने के बाद उनके घर वाले फरार हो गए और स्मिता को पता नहीं कि पिछले चार महीनों में इस मामले में क्या प्रगति हुई है। स्मिता बताती हैं कि अगर मुझे कुछ कार्यकर्ताओं का समर्थन नहीं मिला होता तो मैं यह लड़ाई जारी नहीं रख पाती।
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6 पुलिसवालों ने थाने में किया गैंगरेप?
पुलिस हेडक्वॉर्टर से चंद कदमों की दूरी पर आईपी एस्टेट थाने में छह पुलिस वालों पर नाबालिग लड़की से गैंग रेप करने का आरोप है। मामले का खुलासा तब हुआ, जब इसी थाने की पुलिस ने पीड़ित लड़की को मयूर विहार में चाइल्ड वेलफेयर कमिटी (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश किया। लड़की ने चार सदस्यों वाली कमिटी के सामने पुलिसवालों पर गंभीर आरोप लगाए।
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Monday, November 19, 2012
जानें स्त्रीधन और दहेज का फर्क
Cancer जानकारी ही बचाव है
इंसान का शरीर एक मशीन की तरह होता है. जिस तरह मशीन में खराबी आती है उसी तरह इंसान के शरीर में भी कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं. इन समस्याओं को हम बीमारियों का नाम देते हैं. इन्हीं बीमारियों में से एक लाइलाज और बेहद जटिल बीमारी है कैंसर.दुनियाभर में लाखों लोग प्रतिवर्ष इस बेहद जटिल बीमारी की वजह से दम तोड़ देते हैं. यूं तो यह बीमारी लाइलाज नहीं है लेकिन सिर्फ तब तक जब तक कि इसका सही समय पर पता चले. जानकार मानते हैं कि कैंसर लाइलाज नहीं है बस जरूरत है इसका सही समय पर पता चलने की और सही इलाज की. एक आम आदमी के लिए यह जरूर एक लाइलाज बीमारी हो सकती है लेकिन इसका महंगा इलाज इसे अमीर लोगों के लिए साध्य बनाता है. यह समाज के लिए बहुत बुरा है कि कैंसर जैसे रोग भी अमीर और गरीब के बीच अंतर देखते हैं.कैंसर क्या होता है?
कैंसर को लेकर लोगों में बहुत सी भ्रांतियां व्याप्त हैं. बहुत से लोगों का मानना है कि कैंसर का कोई इलाज नहीं है. दरअसल, कैंसर शरीर की आधारभूत इकाई कोशिका (सेल) को प्रभावित करता है. शरीर में नए सेल्स और पुराने सेल्स के बदलाव की प्रक्रिया में कैंसर हो सकता है. सामान्य तौर पर शरीर में कुछ नए सेल्स बनते हैं और पुराने सेल्स टूटते हैं जिनके असमान्य जमाव से कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है. आइए जानें किन परिस्थितियों में कैंसर हो सकता है:
कैंसर के लक्षण
कैंसर के लक्षण बेहद आम लेकिन जल्द नजर में आने वाले होते हैं. एक कैंसर मरीज की सूरत देखकर ही लगता है कि कुछ गड़बड़ है. जानकारों के अनुसार कैंसर के शुरुआती लक्षण निम्न हैं:
कैंसर का इलाज
कैंसर का पता बायोप्सी नामक टेस्ट से चलता है. इसके बाद कैंसर का पता लगाने के बाद जो इलाज किया जाता है, उसमें कीमोथेरेपी प्रमुख है. कीमोथेरेपी कैंसर के असर को कम करने के लिए दी जाती है. उदाहरण के लिए अगर कैंसर चौथी स्टेज पर हो तो यह थैरेपी इसे दूसरी स्टेज पर ले आती है. यह हर तरह के कैंसर में नहीं दी जा सकती. इसी तरह रेडियोथेरेपी शरीर में कैंसर के ऊतकों को कम करने के लिए दी जाती है.
डॉक्टर मानते हैं कि कैंसर ठीक हो सकता है बशर्ते इसका डटकर सामना किया जाए. हमें इससे डरना नहीं चाहिए. कैंसर पर विजय हासिल करने में इन सुझावों पर ध्यान दें:
1. जांच होने के बाद कैंसर के उपचार का पहला अवसर ही सर्वश्रेष्ठ अवसर है. इस अवसर को गंवाना जानलेवा हो सकता है.
2. निकट के कैंसर संस्थान का ही उपचार के लिए चयन करें, ताकि आप लम्बे इलाज के लिए आवश्यकतानुसार समय-समय पर अपने विशेषज्ञ के पास पहुंच सकें.
3. कैंसर विशेषज्ञ की ही बातों पर अमल करें. गैर-जानकार व्यक्ति की सुनी-सुनाई बातों को सुन आप भ्रमित हो सकते हैं.
4. बॉयोप्सी जांच से कैंसर फैलता नहीं है. इस गलत धारणा के कारण बहुत से लोग अपना उपचार समय से न कराकर मर्ज बढ़ा लेते हैं. बॉयोप्सी से ही कैंसर के प्रकार व संभावित उपचार का निर्धारण होता है.
5. कैंसर विशेषज्ञ से रोग की वार्षिक जांच कराते रहने से रोग का प्रारंभिक अवस्था में पता चल जाता है. प्रारंभिक अवस्था में अधिकांश कैंसर पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, बशर्ते आप पूरी तरह से मन लगाकर उपचार में जुट जाएं.
कैंसर से दूर रहने के सरल तरीके
अगर हम अपनी जीवनशैली में थोड़ा-बहुत भी परिवर्तन करते हैं तो कैंसर से बच सकते हैं. डॉक्टर कैंसर से दूर रहने के कुछ बेहद सरल तरीके बताते हैं जो निम्न हैं:
कैंसर की रोकथाम
ध्रूमपान न करें: विश्व में कैंसर से बचने के लिए तम्बाकू से बचाव एकमात्र उपाय है.
मोटापा: कैंसर नियंत्रण के लिए भोजन में सुधार दूसरी महत्वपूर्ण पहल है. कई प्रकार के कैंसर का वजन अधिक होने और मोटापे से सीधा संबंध है. यही नहीं, फलों और सब्जियों की अधिकता वाला भोजन लेने से कई प्रकार के कैंसर से लड़ने में सहायता मिलती है.
नियमित व्यायाम: नियमित शारीरिक व्यायाम और सही शारीरिक वजन और संतुलित भोजन निश्चित रूप से कैंसर के खतरे को कम करता है.
किरणों से बचना: सूर्य की किरणों से बचना. सनस्क्रीन और सुरक्षित वस्त्र का उपयोग विभिन्न प्रकार के कैंसर की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय है.
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बस शारीरिक संबंध बनाने में ही रुचि
आमतौर पर यह माना जाता है कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुष शारीरिक संबंधों के प्रति अधिक आकर्षित रहते हैं. महिलाएं उनके लिए इच्छापूर्ति का एक साधन मात्र हैं. प्रेम संबंधों में भी पुरुष अपनी जरूरत के हिसाब से महिलाओं की भावनाओं को आंकते हैं. महिलाएं जिन्हें हम भावुक ज्यादा मानते हैं, वह जल्दी ही उनके बहकावे में आ जाती हैं और विवाह के पहले ही स्वयं को अपने प्रेमी के प्रति समर्पित कर देती हैं. भोग और विलास से परिपूर्ण पुरुष अगर अपनी प्रेमिका को शारीरिक संबंध बनाने के लिए राजी नहीं कर पाता तो इसके लिए वह अपने संबंध से बाहर का रुख करता है. आम बोलचाल में इसे पेड-सेक्स कहते हैं. महिलाओं को भोग की वस्तु समझने वाले पुरुष शारीरिक संबंधों के प्रति इतना आसक्त हो जाते हैं कि वे इसके लिए भारी-भरकम कीमत चुकाने को भी तैयार रहते हैं. ऐसे पुरुष के लिए यह कतई मायने नहीं रखता कि किसी की प्रेम भावनाएं उससे जुड़ी हुई हैं.
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लेकिन जैसे-जैसे समय बदल रहा है, व्यक्ति का चरित्र, उसका स्वभाव भी महत्वपूर्ण ढंग के परिवर्तित हो रहा है. पहले जहां विवाह से पूर्व पुरुष के साथ संबंध स्थापित करना तक निंदनीय और पूर्णत: निषेध माना जाता था. वही आधुनिक होते समाज में यह एक आम बात बन गई है. पुरुष तो स्वभाव से ही भोग और विलास भरे जीवन में विश्वास रखते थे. उनके लिए शारीरिक संबंध बनाने के लिए विवाह तक का इंतजार करना जरूरी नहीं था. वैवाहिक संबंध के बाहर उन्हें शारीरिक संबंध बनाने के लिए चाहे कितना ही खर्च क्यों ना करना पड़े, अपनी इच्छा पूरी करने के लिए वे इसकी ज्यादा फिक्र नहीं करते थे. लेकिन अब महिलाएं भी विवाह पूर्व संबंध स्थापित करने में कोई बुराई नहीं समझतीं. यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि उनका प्रेमी उन्हें किस तरह राजी करता है.
एक नए अध्ययन के अनुसार लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं प्रेम-संबंध की शुरूआती चरण में ही शारीरिक संबंध स्थापित कर लेती हैं. उनका यह कदम दूसरी महिलाओं पर दबाव डालता है. महिलाएं नहीं चाहतीं कि उनका प्रेमी उन्हें छोड़कर किसी अन्य महिला के पास चला जाए इसीलिए वह उसके साथ शारीरिक संबंध बना लेती हैं. निश्चित तौर पर महिलाओं का यह व्यवहार पुरुषों की अपेक्षाओं को नकारात्मक स्वरूप में विस्तृत कर रहा है.
कई समाज मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि महिलाएं अपने संबंध के स्थायित्व को लेकर आश्वस्त हुए बिना ही संबंध बना लेती हैं. उन्हें ना तो प्रतिबद्धता से कोई लेना-देना होता है और ना ही संबंध की निश्चितता से.
शारीरिक संबंध बस इस बात पर निर्भर करते हैं कि पुरुष अपनी पार्टनर को कितनी जल्दी और किस तरह सेक्स के प्रति लुभा सकता है. यह मूल्य एक बढ़िया सा गिफ्ट या फिर संबंध को आगे बढ़ाने के प्रतीक के रूप में दी गई अंगूठी भी हो सकती हैं. मुख्य तौर पर यह इस बात पर निर्भर करता है कि महिलाओं का स्वभाव और उनकी प्राथमिकता क्या है.
केथलीन का कहना है कि कुछ महिलाएं भौतिकवादी ज्यादा होती हैं तो उनके लिए पार्टी या गिफ्ट देने से काम चल सकता है, वहीं कुछ भावनात्मक स्वभाव की होती हैं, झूठी ही सही उन्हें प्रतिबद्धता देने से वह आपके लिए कुछ भी कर सकती हैं.
इस सर्वेक्षण को आगे बढाते हुए वैज्ञानिकों ने पाया कि 30 प्रतिशत से ज्यादा पुरुष अपने संबंध में सिर्फ सेक्स को ही अहमियत देते हैं. उनके लिए रोमांस करना या प्रेमिका की भावनाओं को महत्व देना कोई मायने नहीं रखता. वह अपने मंतव्यों को पूरा करने के लिए प्रेमिका से मिलते हैं.
इस सर्वेक्षण को अगर हम भारतीय युवाओं की मानसिकता के आधार पर देखें तो इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि हमारे युवाओं पर भी आधुनिकता हावी हो गई है. परिवार के बड़े जहां विवाह पूर्व युवक और युवती का मिलना तक सहन नहीं करते, वहीं हमारा युवा वर्ग सारी सीमाएं लांघने को भी गलत नहीं समझता. किसी से प्रेम करना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन उसे सिर्फ शारीरिक संबंधों की कसौटी पर परखना सही नहीं कहा जा सकता. पुरुष महिलाओं को भोग की वस्तु समझने लगे हैं. जिसका प्रयोग उनकी सहूलियत के हिसाब से किया जाता है.
जहां एक ओर कुछ महिलाएं प्रेम में धोखा खाती हैं, प्रेमी के प्रति समर्पित होने के बाद उनका प्रेमी उन्हें किसी और के लिए छोड़ जाता है, वहीं दूसरी ओर् कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो भौतिकवादी वस्तुओं को प्रमुखता देती हैं. प्रेम नहीं वह अपने प्रेमी का उपयोग करती हैं, उनके पैसों को तरजीह देती हैं. फिर चाहे इसके एवज में उन्हें कुछ भी क्यों ना करना पड़े वह इसमें कोई परहेज नहीं करतीं. संबंध की दुहाई देते हुए वह बस अपने मंतव्य साध रहे होते हैं. ऐसी महिलाओं के लिए शारीरिक संबंध कोई बड़ी बात नहीं होते. ऐसे संबंध में जब महिला और पुरुष जिनमें किसी प्रकार की आपसी भावनाएं नहीं हैं, वह संबंध के टूटने का शोक नहीं मनाते बल्कि उपयोगिता अनुसार अन्य साथी की तलाश करते हैं. लेकिन इसका सीधा प्रभाव उन महिलाओं पर पड़ता है जो अपनी सीमाएं जानती हैं और वास्तव में अपने प्रेमी से भावनात्मक लगाव रखती हैं. पुरुषों को जब अपना मनचाहा विकल्प कहीं और मिल रहा होगा तो वह कब तक खुद को बांध कर रखेंगे.अपनी साथी की भावनाओं की परवाह किए बगैर वह संबंध समाप्त कर लेते हैं.
महिलाओं को अपनी उपयोगिता समझनी चाहिए.अगर आपका प्रेमी सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने में ही रुचि रखता है तो यह बात स्पष्ट है कि आपकी जगह कोई भी ले सकता है.शारीरिक संबंध विवाह के पश्चात स्थापित किए जाए तो ही बेहतर है. प्रेम जैसी पवित्र भावना का मजाक बनाना किसी भी रूप में लाभकारी सिद्ध नहीं हो सकता.भौतिकवादी सुख-सुविधाओं को अपनी प्रमुखता समझना कुछ समय के लिए संतुष्टी जरूर दे सकता है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बेहद घातक हो सकते हैं.
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स्त्रियों पर अंकुश लगाता लोकतांत्रिक समाज
जिस दिन भारत में एक पंचायती फरमान महिलाओं की स्वतन्त्रता पर अंकुश लगा रहा था उसके दूसरे ही दिन अमेरिका अपने देश की एक महिला को अन्तरिक्ष में भेजने की तैयारी में जुटा था . उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक खाप पंचायत द्वारा महिलाओं पर लगाए गए अंकुश और अमेरिका में एक महिला को अन्तरिक्ष में भेजने की घटना विकसित और विकासशील देशो के बीच मुद्दों में अंतर को रेखांकित करता है . भारतीय मूल की 46 वर्षीय अमेरिकी अन्तरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स दूसरी बार अन्तरिक्ष में कदम रखने जा रही है और दूसरी ओर बागपत जिले के खाप पंचायत का फरमान है कि 40 वर्ष से कम उम्र की महिला बाजार में नहीं जा सकती है . क्या हम कल्पना कर सकते है कि सुनीता विलियम्स अगर भारत में होती तो क्या कर रही होती ?
क्या कारण है कि अमेरिका जैसे देशो में महिलायें इतनी स्वतंत्र है और भारत में महिलाओं के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा हो गई है . हम कह सकते है कि वे देश आर्थिक रूप से संपन्न है . लेकिन यह केवल आर्थिक सम्पन्नता का ही मुद्दा नहीं है . यहाँ वैचारिक सम्पन्नता का मुद्दा ज्यादा अहम् है . आज भारत में यदि कोई महिला आर्थिक रूप से संपन्न भी है तो वह समाज की बुरी परम्परा और समाज की लगाईं गई पाबंदियो से मुक्त नहीं है . जिस प्रकार से बागपत जिले की खाप पंचायत ने अपने तानाशाही फैसले में महिलाओं के ऊपर उनकी स्वतन्त्रता को सीमित करने के फरमान जारी की है वह समाज की संकीर्णता के साथ ही प्रशासनिक शिथिलता को भी उजागर करता है . 40 वर्ष से कम उम्र की महिला बाजार नहीं जायेगी , महिलाए मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करेंगी , सर और चेहरा ढँक कर ही कोई महिला बाहर निकलेगी जैसे फैसले क्या लोकतांत्रिक समाज की विशेषता इंगित कर सकता है ? ये फैसले हमें तालिबानी फरमानों से तुलना करने पर विवश करते है . उन समाजो का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से समाज में अव्यवस्था और अराजकता पैदा हो रही है . लेकिन क्या महिलाओं का ही इसमें कसूर है , इसके अलावा और कोई कारक इसमें शामिल नहीं है . क्या कोई खाप पंचायत पुरुषो के ऊपर इस तरह के फैसले लेता है ? फिर महिलाओं को ही हर बात के लिए क्यों बलिदान देना होता है ? स्त्रियाँ महज पुरुषो की गुलाम होती है और समाज में पुरुष प्रधान है जैसी मानसिकता ही इस तरह के फैसलों का समर्थन कर सकती है .
खाप पंचायत के इन फैसलों के पहले भी 9 जुलाई को असम की एक किशोरी के साथ दुराचार की घटना को देखा गया . इसके अलावा भी देश के विभिन्न हिस्सों में प्रायः रोज ही महिलाओं के साथ ऐसी घटनाएं होती रहती है . राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2011 में इस तरह की 2 .25 लाख घटनाएं दर्ज की गई है . हमारे समाज का एक बड़ा तबका नारी को उसी मध्यकालीन सोच की दृष्टि से देखता – समझता है . और यही समाज उन पर तमाम तरह के अत्याचार करता है . देश में महिलाओं पर कई तरह के अत्याचारों की घटनाएं प्रायः हम रोज सुनते है .राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ो के अनुसार भारत में प्रति 24 मिनट पर एक महिला यौन शोषण , प्रति 43 मिनट में एक महिला अपहरण , प्रति 54 मिनट में एक महिला बालात्कार , प्रति 102 मिनट में एक महिला दहेज़ प्रताड़ना की शिकार होती है . क्या ये आंकड़े किसी भी सभ्य समाज को स्वीकार्य होंगे? फिर भी हमारा समाज ही इन घटनाओं को अंजाम देता है . इसका कारण यह है कि हमारा समाज आज भी उस प्राचीन शोषणवादी मानसिकता से बाहर नहीं आ पाया है जो कि महिला को अबला का दर्जा देता है . पारंपरिक भारतीय समाज महिलाओं पर कई तरह की जन्मजात निर्योग्यताएं लागू कर दिया है जिस पर महिलाओं का कोई वश नहीं है . क्या कारण है कि आज भी हमारे समाज में बाल विवाह , दहेज़ ह्त्या , भ्रूण ह्त्या की घटनाएं प्रबल वेग से विद्यमान है ?
इन घटनाओं के दूसरी ओर प्रशासनिक शिथिलता का मुद्दा भी सामने आया ही . खाप पंचायत का फरमान और उसे मानने की विवशता क्यों है ? देश के अधिकाँश भागो में लोग अशिक्षा , गरीबी , बेरोजगारी और अज्ञानता में जी रहे है . उनके लिए लोकतंत्र , समानता , मानवाधिकार , स्त्री अधिकार जैसे शब्द समझ से परे है . विकास की अंधी दौड़ में हम यह भी भूल गए है कि देश में नागरिको की जागरूकता भी कोई चीज होती है . ग्रामीणों के यह परम्परा रही है कि पंच परमेश्वर की तरह और उनका फैसला भगवान् का फैसला होता है . परन्तु आज यह पंच अपने मूल स्वरुप में नहीं है . उनका चरित्र और उनका फैसला दोनों विकृत हो चुका है . ऐसा इसलिए है क्योकि पांचो का संगठन मजबूत है . वे इलाके के दबंग और शक्तिशाली लोग होते है . उनके फरमान को मानना बाध्यकारी होता है . उनकी पैठ प्रायः प्रशासनिक अमले में भी होती है . अतः. उनके फैसले को न मानने का मतलब है बिरादरी और प्रशासन दोनों से दुश्मनी मोल लेना . यह तश्वीर वर्तमान भारत की है जिसने आजादी के 64 वर्षो का सफ़र तय कर लिया है . गांधी जी का सपना था कि वे भारत में मजबूत लोकतंत्र पैदा करे , जिसके लिए विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्वशासन जरुरी है . लेकिन वर्तमान में यह शासन दब्वंगो का शासन बन कर रह गया है . जाग्रुक्लता के अभाव में और बेहतर प्रशासनिक पहुँच के अभाव में देश की अधिकाँश आबादी इन संकीर्ण फरमानों को मानने को विवश है जिनका कोई लोकतांत्रिक मूल्य नहीं है .
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कांटे की तरह चुभती है महिलाओं की आजादी
क्या बिडंवना है कि एक ओर तो हम नारी सशक्तिकरण की बात करते है,नारी को पुरुषों के समान दर्जा दिलाने का दाबा करते हैं | वहीं दूसरी ओर उसकी इज्जत को जब चाहें,जहाँ चाहें तार-तार करने से नहीं चूकते हैं | नारी पर प्रतिबन्ध लगाने के फरमान जारी करते हैं | सोमबार 9 जुलाई को असम की राजधानी गुहावटी में एक लडकी को लगभग एक दर्जन दरिंदो ने शाम को पकड़ लिया तथा सरे आम उसके साथ छेड़-छाड़ कर कपड़े भी फाड़ डाले | मौके पर मौजूद एक सिपाही तथा अन्य लोग तमाशबीन बने खड़े रहे | किसी ने उसे बचाने का साहस नही दिखाया | इसी तरह दो दिन पूर्व बिहार की राजधानी पटना में चार दरिंदों ने एक छात्रा को अगवा कर बंधक बना लिया तथा उसके साथ अनाचार किया | दरिंदों ने उसकी वीडियो क्लिप भी बना डाली | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ भी मानवता को शर्मसार करने वाली ऐसी घटनायों से अछूती नहीं रही | जहाँ एक दुखिहारी की अस्मत लूटने की कोशिश किसी और ने नहीं बल्कि कानून के रखवाले एक दरोगा ने की | वह भी थाने के भीतर | इधर,एक नया मामला उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के आसरा गाँव से आया है,जहाँ 36 बिरादरियों की खाप द्वारा महिलाओं के खिलाफ एक तुगलकी फरमान जारी किया गया | जिसके तहत 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाएं अकेले बाजार नहीं जायेंगीं |फरमान में यह भी कहा गया है कि कोई महिला मोबाईल फोन नहीं रखेगी | खाप का यह भी कहना है कि लड़कियां चुन्नी डालकर घर से बाहर निकलेंगीं | साथ ही कोई जोड़ा प्रेम विवाह नहीं करेगा | यदि किसी ने ऐसा किया तो उसे बिरादरी से बाहर कर दिया जायेगा | इस फरमान के बाद शासन व प्रशासन सक्रीय हुआ तथा दो लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया | केंद्रीय गृह मंत्री चिदम्वरम ने इस फरमान की काफी निंदा की | महिलाओं के साथ हुईं उक्त घटनाएँ तथा खाप पंचायत द्वारा जारी यह फरमान कोई नई बात नहीं है | ऐसा पहले भी होता रहा है,लेकिन यहाँ एक ही सवाल मन में बार-बार कौंध रहा है,वह यह कि सारे फतवे महिलाओं के खिलाफ ही क्यों जारी किये जाते हैं ? पुरुषों के खिलाफ क्यों नहीं ? जबकि अपराधी तो पुरुष है | घिनौने कृत्य तो वह करता है और सजा महिला को सुनाई जाती है | आखिर क्यों महिला की इज्जत इतनी सस्ती लगती है कि उसे सरेआम तार-तार करते हुए जरा भी हाथ नहीं कांपते ? यह घटनाएँ यह समझने को काफी हैं कि पुरुष प्रधान समाज की आँखों में महिला की आजादी कांटे की तरह चुभती है | सो,वह उसे ही निशाना बना रहा है | यही नहीं पुरुष प्रधान समाज नारी को अपने हाथों का खिलौना बनाकर रखना चाहता है | जो भी हो,जब तक अनाचार करने वालों तथा अपने आप को कानून से ऊपर समझने वाली खाप तथा कट्टा जैसी पंचायतों के खिलाफ सरकारें कोई ठोस कदम नहीं उठातीं,सच मान लो,तब तक नारी पर होने वाले अत्याचार रुकेंगे नहीं |
पत्नी की इज्जत का सौदा
विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में पांच हजार की उधारी चुकाने के लिए एक युवक ने अपनी पत्नी की इज्जत का ही सौदा कर दिया। महिला के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी और पीडित महिला के पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मिली जानकारी के अनुसार लटेरी थाना क्षेत्र के अर्जुन अहिरवार ने लियाकत नाम के व्यक्ति के पांच हजार रूपए उधारी में लिए। अर्जुन उधारी के राशि नहीं चुका पाया तो लियाकत ने उसकी पत्नी की इज्जत की मांग कर डाली। इसके लिए दोनों के बीच समझौता भी हो गया।
किसी ने नहीं की मदद
समझौते के मुताबिक अर्जुन पत्नी को दर्शन कराने के बहाने बाहर लेकर निकला। सुनसान स्थान पर पहुंचकर लियाकत को सौंप दिया। महिला ने विरोध किया और लियाकत द्वारा बलात्कार किए जाने पर वह रोई भी, मगर मदद के लिए कोई नहीं आया।
विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में पांच हजार की उधारी चुकाने के लिए एक युवक ने अपनी पत्नी की इज्जत का ही सौदा कर दिया। महिला के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी और पीडित महिला के पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मिली जानकारी के अनुसार लटेरी थाना क्षेत्र के अर्जुन अहिरवार ने लियाकत नाम के व्यक्ति के पांच हजार रूपए उधारी में लिए। अर्जुन उधारी के राशि नहीं चुका पाया तो लियाकत ने उसकी पत्नी की इज्जत की मांग कर डाली। इसके लिए दोनों के बीच समझौता भी हो गया।
किसी ने नहीं की मदद
समझौते के मुताबिक अर्जुन पत्नी को दर्शन कराने के बहाने बाहर लेकर निकला। सुनसान स्थान पर पहुंचकर लियाकत को सौंप दिया। महिला ने विरोध किया और लियाकत द्वारा बलात्कार किए जाने पर वह रोई भी, मगर मदद के लिए कोई नहीं आया।
सुहागरात पर बीवी को किया दोस्तों के हवाले
लव मैरेज करने वाली एक दुल्हन को अपने प्रेमी की असली तस्वीर उस समय देखने को मिली, जब उसने सुहागरात के मौके पर उसे अपने सात दोस्तों के हवाले कर दिया। प्रेमी उसे घर से भगाकर ले गया था। दोनों ने गाजियाबाद के एक मंदिर में शादी की थी। इससे पहले युवती के पिता ने 18 अक्टूबर को औरंगाबाद थाने में तहरीर देकर गांव के ही एक युवक पर बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का आरोप लगाया था। पुलिस तभी से इस प्रेमी जोडे़ की तलाश कर रही थी।
पांच दिन पहले पुलिस ने लड़की को बरामद कर लिया जबकि उसका प्रेमी पुलिस को देखकर फरार हो गया। प्रेमिका का आरोप है कि सुहागरात पर उसके प्रेमी ने अपने सात दोस्तों के साथ उससे गैंगरेप किया। यह सिलसिला एक महीने तक चलता रहा। युवती ने बताया कि वह थाना औरंगाबाद क्षेत्र के गांव अशरफपुर की रहने वाली है। वह पिछले 4 साल से गांव के युवक मोनू से बेहद प्यार करती थी। 18 अक्टूबर की रात को प्रेमी की प्लैनिंग के तहत वह घर से ढाई लाख कीमत के सोने-चांदी के गहने लेकर भाग गई। प्रेमी ने गाजियाबाद में किराये पर कमरा ले रखा था।20 अक्टूबर को दोनों ने एक मंदिर में जाकर शादी रचा ली। शादी के बाद जब वह अपने कमरे पर पहुंची तो उसका प्रेमी उसे छोड़कर दोस्तों के साथ शराब पीने चला गया। आरोप है कि देर रात वह अपने सात दोस्तों के साथ आया और उसे दोस्तों के हवाले कर दिया। लड़की का आरोप है कि एक महीने तक बंधक बनाकर उसके साथ सभी आठ आरोपियों ने गैंगरेप किया। परिजनों की मदद से बुलंदशहर पुलिस ने युवती को 10 नवंबर को गाजियाबाद के बस स्टैंड चौराहा से बरामद कर लिया। एसपी सिटी श्रीकांत यादव ने बताया कि लड़की अपने बयान कई बार बदल चुकी है। शुरुआती पूछताछ में उसने पुलिस को भी गुमराह करने की कोशिश की। दो दिन पहले लड़की ने मैजिस्ट्रेट के सामने अपने साथ हुए गैंगरेप का खुलासा किया। पुलिस ने लड़की का मेडिकल कराया है। पुलिस लड़की के बयानों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर मुख्य आरोपी की तलाश कर रही है। प्यार ठुकराया तो फेक अकाउंट बना पोस्ट कर दीं अश्लील तस्वीरें
प्यार का प्रपोजल ठुकराए जाने पर एक युवक ने ऐसा कदम उठाया कि उसे जेल की हवा खानी पड़ी। बदला लेने के लिए मकसद से युवक उस लड़की के नाम से फेसबुक पर फेक अकाउंट बनाकर अश्लील फोटो पोस्ट कर रहा था।
तलेगांव के रहने वाले भूपेश ने इंजिनियरिंग की एक स्टूडेंट से प्यार का इजहार किया, लेकिन उसने मना कर दिया। इस पर गुस्साए भूपेश ने लड़की से बदला लेने की ठान ली। उसने लड़की के नाम से फेसबुक पर फेक प्रोफाइल बनाकर अश्लील तस्वीरें और मैसेज अपडेट करना शुरू कर दिया। उधर लड़की सो समझ नहीं आ रहा था कि यह हरकत कौन कर रहा है। आखिरकार लड़की ने पुलिस की मदद ली और साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद साइबर सेल ने फेक आईडी ऑपरेट करने वाले का आईपी अड्रेस ढूंढ निकाला। इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर की मदद से पुलिस ने रायगढ़ जिले के नवी पोसरी के उस साइबर कैफे पहुंची, जहां से उस आईडी को ऑपरेट किया जाता था। साइबर कैफे में पूछताछ करने पर पता चला कि वहां पर काम करने वाली लड़की का भाई अक्सर वहां आया करता है। उस लड़की का भाई कोई और नहीं बल्कि भूपेश ही था। फोन पर प्रेम हुआ था, मिली तो बेहोश हो गई
आजकल इंटरनेट और फोन आदि के माध्यम से अक्सर लोग संपर्क में आते हैं। फोन और दूसरे संचार के माध्यम से वे एक-दूसरे के करीब भी आ जाते हैं, पर अक्सर इसमें ऐसा भी धोखा हो जाता है कि सिवाय अफसोस करने के कुछ नहीं बचता। केरल में कनूर जिले में 23 साल की एक इंजीनियर का मामला भी कुछ ऐसा ही निकला। उसको उस वक्त शॉक लगा जब वह अपने 'प्रेमी' से मिली।
पिछले एक साल से वह फोन पर अपने इस प्रेमी के साथ बातें कर रही थीं। साल भर बाद जब वह अपने इस फोन प्रेमी से मिली तो सारा रोमांस धरा का धरा रह गया और दिल भी टूटा सो अलग। इसलिए कि उनका यह प्रेमी तो 67 साल का निकला।
यह भी तब पता चला जब यह लड़की अपने फोन वाले प्रेमी से मिलने तिरुअनंतपुरम आई। यहां उसे जीवन का सबसे बड़ा शॉक लगा। पुलिस ने बताया कि लड़की काफी देर से उस बस स्टॉप पर टहल रही थीं जहां उसके प्रेमी ने उससे मिलना तय किया हुआ था। जब काफी देर तक वह नहीं आया और लड़की वहां परेशान होकर टहलती रही, तो पुलिस उसे थाने ले आई।थाने में उससे पूछा गया कि वह वहां क्यों टहल रही थी, तब उसने अपना किस्सा बयां किया। लड़की से उसके प्रेमी का मोबाइल नंबर लेकर पुलिस ने उसे थाने बुलाया। वह आया तो उसे देखते ही लड़की बेहोश हो गई। इसलिए कि वह आदमी निकला 67 साल का। इस आदमी ने पुलिस को बताया कि वह तो सिर्फ मनोरंजन के लिए फोन पर बातें किया करता था। उसका इरादा गलत नहीं था। बहरहाल, पुलिस ने लड़की के घरवालों से संपर्क कर उसे वापस उसके घर भेज दिया है।
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