Thursday, October 11, 2012

ममता हुई शर्मसार

डूंगरपुर। बालक-बालिका में भेद समाप्ति के तमाम सरकारी प्रयासों को धत्ता
दिखाते हुए बुधवार को जिले के आसपुर उपखंड के तालोरा गांव की एक मां ने
ममता को शर्मसार कर चलती एम्बुलेंस से नवजात बच्ची को सड़क किनारे फेंक
दिया। पर कहते हैं ना कि जाको राखे सांईया मार सके ना कोई। वापसी में उसी
एम्बुलेंस से बच्ची को साबला पीएचसी लाया गया। पुलिस की मध्यस्थता के बाद
बच्ची को पुन: पिता को सुपुर्द किया।
यह हुआ घटनाक्रम
तालोरा निवासी मंजू पत्नी धूला ने दो दिन पूर्व साबला प्राथमिक स्वास्थ्य
केंद्र पर एक बच्ची को जन्म दिया। मंजू के पूर्व में भी तीन पुत्रियां
हैं। बुधवार शाम को अस्पताल से डिस्चार्ज होने पर एम्बुलेंस से ही
जच्चा-बच्चा को तालोरा के लिए रवाना किया। रास्ते में घाटी पर वाहन धीरे
होते ही मंजू ने कपड़े में लिपटी मासूम को सड़क किनारे डाल दिया। इस बात
की भनक एम्बुलेंस चालक को नहीं लग पाई।उसी एम्बुलेंस से पहुंची अस्पताल
इधर, सड़क किनारे नवजात बच्ची पड़ी होने की खबर मिलते ही मौके पर
ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। मंजू को तालोरा छोड़ कर वापस लौट रही
एम्बुलेंस को ग्रामीणों ने रूकवा कर लावारिस मिली बच्ची को साबला पीएचसी
पहुंचाया। वहां चिकित्सक व अस्पताल स्टाफ ने इलाज के दौरान बच्ची की सूरत
जानी पहचानी लगी।इस पर अस्पताल रिकार्ड खंगाला। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर साबला चौकी
से पुलिस दल भी पहुंचा। बाद में पुलिस के माध्यम से मंजू के घर पर टोह
ली। छानबीन होने पर पति धूला अस्पताल पहुंचा। यहां उसने पूरे घटनाक्रम से
अनभिज्ञता जता दी। पुलिस ने फटकार कर उसे बच्ची वापस सुपुर्द की। समाचार
लिखे जाने तक इस आशय की कोई लिखित शिकायत थाने में दर्ज नहीं हुई थी।
बच्ची को पूरी तरह से स्वस्थ बताया गया।


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