आज के युग में यदि किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो जाती है तो मौत के कारण का पता लगाने के लिये उसके शव का पोस्टमार्टम किया जाता है। पोस्टमार्टम लाश को नंगा किये बिना करना सम्भव नहीं है बल्कि शरीर पर किसी चोट, ज़हरीली सुई आदि के निशान का पता लगाने के लिए ज़रूरी है कि डाक्टर उसके प्रत्येक अंग का बारीकी से अवलोकन करे। यदि लाश किसी स्त्री की है तो डाक्टर के लिए यह पता लगाना ज़रूरी होता है कि मृतका के साथ सम्भोग तो नहीं किया गया है जिसके लिए उसके शरीर में किसी भी औज़ार के दाख़िल कराए जाने की ज़रूरत को नज़र अन्दाज़ नहीं किया जा सकता। जीवित रहते हुए जिस महिला को अपराधी होने के बावजूद भी पुरुष पुलिस के द्वारा पकड़े जाने तक को बरदाश्त नहीं किया जाता और सरकार द्वारा भी महिला पुलिस उपलब्ध कराई जाती है तो फिर मरने के बाद पोस्ट मॉर्टम की आवश्यकता पड़ने पर महिला डाक्टर की सेवा क्यों नहीं ली जाती और पुरुष डाक्टर के सामने उसको बेपर्दा करने के लिये छोड़े जाने का क्या औचित्य है?
इसके अतिरिक्त एक बात यह है कि अन्तिम संस्कार के लिए मुर्दे को यदि दूसरे सामान की तरह ले जाया जाय तो उसको न तो चोट लगने का डर होगा और न ही टूट फूट का अन्देशा परन्तु ऐसा न करके उसको कन्धों पर उठा कर सम्मान पूर्वक ले जाए जाने की परम्परा का होना मुर्दे के प्रति आदर भाव को प्रदर्शित करता है। परन्तु पोस्ट मॉर्टम की प्रक्रिया में शव की जिस प्रकार से दुर्गति होती है उसके कारण अक्सर लोग शव का पोस्ट मॉर्टम कराने से बचते हैं चाहे मौत की गुत्थी अन सुलझी ही क्यों न रह जाए। बुद्धिजीवी वर्ग को चाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमतानुसार व्यक्गित अथवा संस्थागत रूप से सरकार को इस बात के लिए आमादा करने की कोशिश करे कि पोस्ट मॉर्टम किये जाने वाले शवों की दुर्गति न की जाए और महिलाओं के शवों का पोस्ट मॉर्टम केवल महिला डाक्टर के द्वारा कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। |
ये उनसभी महिलावों को समर्पित है जो एक माँ हैं,बहन हैं,बीबी हैं,बेटी हैं,दोस्त हैं,प्रेमिका हैं,सहयोगी हैं तथा अन्य हैं।पुज्नीय हैं।जिस घर में महिला की इज्जत नहीं होती वो घर भी नहीं बचता,खान-दान का नाश हो जाता है । आज जो महिलावों पर अपनी मर्दानगी साबित कर रहें हैं तथा दहेज़ हत्या ,भ्रूण हत्या,बलात्कार,छेड़-छाड़ ,मारपीट तथा अन्य घृणित अपराध करते हैं वो असल में अपनी माँ के कोख को गाली देते हैं ।उनके खून में अवश्य कोई गन्दगी होगी। कब तक सहेंगी।कब तक ....
Monday, October 15, 2012
महिलाओं के शवों का पोस्टमार्टम केवल महिला डाक्टर के द्वारा किया जाए
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